"अकरबापरवारी"
हैरानथामैंऔरपरेशानभीथामैं,कोईनहींथाजिसेयेसमझाताथामैं
वोख़ामोशरातोमेंख़ुदसेलड़ना,महफ़िलमेंख़ुदकोसालिमसादिखाताथामैं
आजसबआगएग़लतऔरसहीकेफैसलेकीलड़ाईमें,कैसेकहदूतुमसहीऔरग़लतमैं
कैसेसमझाऊयेजंगनहींहैकोई"अकरबापरवारी"की,येजंगहैउसबीमारीकी
येवोदर्दहैजोहरकिसीकोअपनोसेमिलताहै,तुमसमझनहींपाएयासमझापायानहींमैं
सबआज़ादहैसबभागरहे,किसेफुरसतहैयहाँकिसीकेदर्दकोसमझनेकी
सबकेअपनेअपने"पैरों-निशा"है,सबकेअपनेअपनेरंगहै"मेहदी"