rooh ko mirii tavajjoh chahiye | रूह को मेरी तवज्जोह चाहिए

  - Ikram Basra
रूहकोमेरीतवज्जोहचाहिए
ज़ख़्मसेगहरीतवज्जोहचाहिए
घरकीहालतदेखकरलगतानहीं
अबइसेकोईतवज्जोहचाहिए
जमगईहैकाईसीदहलीज़पर
तेरेक़दमोंकीतवज्जोहचाहिए
पहलेमुझकोचाहिएथातूमगर
अबफ़क़ततेरीतवज्जोहचाहिए
एकचश्म-ए-तरकहींगुमहोगई
मिरीमिट्टीतवज्जोहचाहिए
डूबतेसूरजकेयेअल्फ़ाज़थे
घुपअँधेरेकीतवज्जोहचाहिए
बे-ख़यालीतूकहाँहैआज-कल
तुझकोभीथोड़ीतवज्जोहचाहिए
कररहेहैंआपदीवानाजिसे
उसकोपहलेहीतवज्जोहचाहिए
  - Ikram Basra
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