paikar-e-mehr-o-wafa rooh-e-ghazal ya'ni tu | पैकर-ए-मेहर-ओ-वफ़ा रूह-ए-ग़ज़ल या'नी तू

  - Iftikhar Raghib
पैकर-ए-मेहर-ओ-वफ़ारूह-ए-ग़ज़लया'नीतू
मिलगयाइश्क़कोइकहुस्न-ए-महलया'नीतू
शहर-ए-ख़ूबाँमेंकहाँसहलथादिलपरक़ाबू
मुज़्तरिबदिलकोमिलासब्रकाफलया'नीतू
ग़म-ए-दिलहोग़म-ए-जानाँकिग़म-ए-दौराँहो
सबमसाइलकामिरेएकहीहलया'नीतू
ढूँडकरलाऊँकोईतुझसाकहाँसेआख़िर
एकहीशख़्सहैबसतेराबदलया'नीतू
प्यासकीज़दमेंमोहब्बतकाशजरया'नीमैं
जिसपेबरसाकभीप्रीतकाजलया'नीतू
क़ल्ब-ए-'राग़िब'मेंअजबशानसेहैजल्वा-फ़गन
दिलरुबाईकाहसींताज-महलया'नीतू
  - Iftikhar Raghib
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