kyuuñ hai lahjaa bujha bujha teraa | क्यूँ है लहजा बुझा बुझा तेरा

  - Iftikhar Raghib
क्यूँहैलहजाबुझाबुझातेरा
क्याहुआअबवोवलवलातेरा
वक़्फ़ेवक़्फ़ेसेखोलकरखिड़की
अच्छालगताहैझाँकनातेरा
तेरीआँखोंमेंझाँककरदेखूँ
अक्समेराहोआइनातेरा
क्यामनाएगाअपनेदिलकीख़ैर
जिससेपड़जाएवास्तातेरा
तीरसालगरहाहैग़ैरोंको
मेरेशे'रोंपेतब्सिरातेरा
टूटजाएडोरसाँसोंकी
बाँधरक्खाहैआसरातेरा
जोभीमिलताथामरनेवालाथा
किससेकरतामैंतज़्किरातेरा
झाँककरतेरीझुकतीआँखोंमें
पढ़लियामैंनेफ़ैसलातेरा
कौनसमझेगामेरेदिलकाहाल
किसनेदेखाहैदेखनातेरा
जानेकबपिघलेउनकादिल'राग़िब'
जानेकबहलहोमसअलातेरा
  - Iftikhar Raghib
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