gire hain lafz varq pe lahu lahu ho kar | गिरे हैं लफ़्ज़ वरक़ पे लहू लहू हो कर

  - Iftikhar Naseem
गिरेहैंलफ़्ज़वरक़पेलहूलहूहोकर
महाज़-ए-ज़ीस्तसेलौटाहूँसुरख़-रूहोकर
उसीकीदीदकोअबरातदिनतड़पतेहैं
किजिससेबातकीहमनेदू-बदूहोकर
बुझाचराग़हैदिलकावगर्नाकैसेमुझे
नज़रआएगावोमेरेचारसूहोकर
हमअपनेआपहीमुजरिमहैंअपनेमुंसिफ़भी
ख़ुदए'तिराफ़करेंअपनेरू-ब-रूहोकर
उसएकख़्वाहिश-ए-दिलकापताचलाउसे
जोदरमियाँमेंरहीसिर्फ़गुफ़्तुगूहोकर
मैंसबमेंरहतेहुएकिसतरहभुलाऊँतुझे
हरएकशख़्सहीमिलताहैमुझकोतूहोकर
अबउसकेसामनेजातेहुएभीडरताहूँ
भुलादियाथाजिसेमहव-ए-जुस्तुजूहोकर
हुईजज़्बज़मींमेंतोरातकीबारिश
फ़ज़ामेंफैलगईख़ाकरंग-ओ-बूहोकर
मिटाजोआँखकेशीशोंसेउसकाअक्स'नसीम'
रगोंमेंफैलगयाख़ूँकीआरज़ूहोकर
  - Iftikhar Naseem
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