ban gaya hai jism guzre qaafilon ki gard sa | बन गया है जिस्म गुज़रे क़ाफ़िलों की गर्द सा

  - Iftikhar Naseem
बनगयाहैजिस्मगुज़रेक़ाफ़िलोंकीगर्दसा
कितनावीराँकरगयामुझकोमिराहमदर्दसा
क्याअभीतकउसकारस्तारोकतीहैकोईसोच
मेरेहाथोंमेंहैउसकाहाथलेकिनसर्दसा
इसतरहघुल-मिलगयाकरनएमाहौलमें
वोभीअबलगताहैमेरेघरकाहीइकफ़र्दसा
जज़्बथाजैसेकोईसूरजहीउसकेजिस्ममें
दूरसेवोसंगलगताथाब-ज़ाहिरसर्दसा
आजतकआँखोंमेंहैमंज़रबिछड़नेका'नसीम'
पैरहनमेलासाउसकाऔरचेहराज़र्दसा
  - Iftikhar Naseem
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