KHud ko hujoom-e-dahr men khona pada mujhe | ख़ुद को हुजूम-ए-दहर में खोना पड़ा मुझे

  - Iftikhar Naseem
ख़ुदकोहुजूम-ए-दहरमेंखोनापड़ामुझे
जैसेथेलोगवैसाहीहोनापड़ामुझे
दुश्मनकोमरतेदेखकेलोगोंकेसामने
दिलहँसरहाथाआँखसेरोनापड़ामुझे
कुछइसक़दरथेफूलज़मींपरखिलेहुए
तारोंकोआसमानमेंबोनापड़ामुझे
ऐसीशिकस्तथीकिकटीउँगलियोंकेसाथ
काँटोंकाएकहारपिरोनापड़ामुझे
कारीनहींथावारमगरएकउम्रतक
आब-ए-नमकसेज़ख़्मकोधोनापड़ामुझे
आसाँनहींहैलिखनाग़म-ए-दिलकीवारदात
अपनाक़लमलहूमेंडुबोनापड़ामुझे
इतनीतवीलसर्दशब-ए-हिज्रथी'नसीम'
कितनीहीबारजागनासोनापड़ामुझे
  - Iftikhar Naseem
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy