tu wajh-e-zindagi hai javaaz-e-hayaat hai | तू वज्ह-ए-ज़िंदगी है जवाज़-ए-हयात है

  - Iftikhar Haidar
तूवज्ह-ए-ज़िंदगीहैजवाज़-ए-हयातहै
वोमुझसेकहरहीथीअभीकलकीबातहै
पहलेपहलतोहमतिरेदिलमेंमुक़ीमथे
पहलेकीबातऔरथीअबऔरबातहै
वोकाएनातभीहैतिरेहुस्नकीअसीर
इसकाएनातसेजोपरेकाएनातहै
वोमिलाहैवक़्तकीदीवारफाँदकर
येइश्क़हैऔरइश्क़दर-ए-मुम्किनातहै
कहताथाजिसकोमैंभीकभीहुस्न-ए-बे-मिसाल
दर-अस्लबे-मिसालनहींबे-सबातहै
तुममौतसेडराओयाभूकऔरप्याससे
खे़
मेंयहींलगेंगेयहींपेफ़ुरातहै
बारिशफुवाररातकीरानीहवाकाशोर
येरातआजकीबड़ीपुर-कैफ़रातहै
  - Iftikhar Haidar
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