zakham dikhaane lag jaati hai jaan ko aane lag jaati hai | ज़ख़्म दिखाने लग जाती है जान को आने लग जाती है

  - Iftikhar Haidar
ज़ख़्मदिखानेलगजातीहैजानकोआनेलगजातीहै
रातगएतन्हाईजिसदमशोरमचानेलगजातीहै
इश्क़दिमाग़कीचक्करबाज़ीहुस्नसरासरदीदकाधोका
दिलकोयेसबकहतेकहतेउम्रठिकानेलगजातीहै
उसशर्मीलीसीलड़कीसेजबभीदिलकीहालतपूछी
सीधीबातनहींकरतीहैनज़्मसुनानेलगजातीहै
रातकोमहरम-ए-राज़समझकररातसेराज़कीबातकहोतो
रातकहाँचुपरहपातीहैबातबढ़ानेलगजातीहै
अंदरकेहालातकोबाहरकीदुनियासेलाखछुपाएँ
वहशतघरकीभेदीबनकरलंकाढानेलगजातीहै
  - Iftikhar Haidar
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