guzishta shab jo itni raushni thii | गुज़िश्ता शब जो इतनी रौशनी थी

  - Iftikhar Haidar
गुज़िश्ताशबजोइतनीरौशनीथी
तुम्हारीयादकीजल्वागरीथी
फ़ज़ामेंगुनगुनाहटथीअजबसी
हवापत्तोंसेबातेंकररहीथी
ग़ज़लजैसासरापाथाकिसीका
कोईसूरतमुकम्मलशाइ'रीथी
तिरेअल्फ़ाज़निश्तरबनगएथे
मोहब्बतइंतिहापरगईथी
सुनाहैबा'दमेरेकुछदिनोंतक
वोमिट्टीपरलकीरेंखींचतीथी
वोगाहेअबपलटकरदेखतीहै
कोईइकबातकहनारहगईथी
वहीहमहैंवहीतीरा-शबीहै
मोहब्बतचारदिनकीचाँदनीथी
लबोंपरक़हक़हेहीक़हक़हेथे
कोईलड़कीथीयावोफुलजड़ीथी
कोईदिलमेंअचानकबसाथा
मोहब्बतकीनहींथीहोगईथी
  - Iftikhar Haidar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy