raushni ki dor thaa | रौशनी की डोर था

  - Iftikhar Falak Kazmi
रौशनीकीडोरथा
मेंज़िंदगीतकगए
चोरअहद-ए-सामरीकेजल-परीतकगए
वाइज़ान-ए-ख़ुश-हवसकीझिड़कियाँसुनतेहुए
ला-शुऊरीतौरपरहमसर
ख़ुशीतकगए
ढोलपीटाजारहाथाऔरख़ालीपेटहम
हँसते-गातेथापसुनतेढोलचीतकगए
वाहिमोंकीना-तमामीकाइलाक़ाछोड़कर
कुछपरिंदेहाथबाँधेसब्ज़गीतकगए
भाईबहनोंकीमोहब्बतकानशामतपोछिए
बे-तकल्लुफ़होगएतोगुदगुदीतकगए
चाक-ए-तोहमतपरघुमायाजारहाथाइश्क़को
जबहमारेअश्कख़्वाब-ए-ख़ुद-कुशीतकगए
गालियाँबकनेलगेग़ुस्सेहुएलड़नेलगे
रक़्सकरतेकरतेहमभीख़ुद-सरीतकगए
हसींलड़कीतुम्हारेहुस्नकेलज़्ज़तपरस्त
काफ़िरीसेसरबचाकरशाइ'रीतकगए
  - Iftikhar Falak Kazmi
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