mirii zindagi men bas ik kitaab hai ik charaaghh hai | मिरी ज़िंदगी में बस इक किताब है इक चराग़ है

  - Iftikhar Arif
मिरीज़िंदगीमेंबसइककिताबहैइकचराग़है
एकख़्वाबहैऔरतुमहो
येकिताबख़्वाबकेदरमियानजोमंज़िलेंहैंमैंचाहताथा
तुम्हारेसाथबसरकरूँँ
यहीकुलअसासा-ए-ज़िंदगीहैइसीकोज़ाद-ए-सफ़रकरूँँ
किसीऔरसम्तनज़रकरूँँतोमिरीदु'आमेंअसरहो
मिरेदिलकेजादा-ए-ख़ुश-ख़बरपेब-जुज़तुम्हारेकभीकिसीकागुज़रहो
मगरइसतरहकितुम्हेंभीउसकीख़बरहो
  - Iftikhar Arif
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