khwaab-e-deerina se ruksat ka sabab poochte hain | ख़्वाब-ए-देरीना से रुख़्सत का सबब पूछते हैं

  - Iftikhar Arif
ख़्वाब-ए-देरीनासेरुख़्सतकासबबपूछतेहैं
चलिएपहलेनहींपूछाथातोअबपूछतेहैं
कैसेख़ुश-तबाहैंइसशहर-ए-दिल-आज़ारकेलोग
मौज-ए-ख़ूँसरसेगुज़रजातीहैतबपूछतेहैं
अहल-ए-दुनियाकातोक्याज़िक्रकिदीवानोंको
साहिबान-ए-दिल-ए-शोरीदाभीकबपूछतेहैं
ख़ाकउड़ातीहुईरातेंहोंकिभीगेहुएदिन
अव्वल-ए-सुब्हकेग़मआख़िर-ए-शबपूछतेहैं
एकहमहीतोनहींहैंजोउठातेहैंसवाल
जितनेहैंख़ाक-बसरशहरकेसबपूछतेहैं
यहीमजबूरयहीमोहर-ब-लबबे-आवाज़
पूछनेपरकभीआएँतोग़ज़बपूछतेहैं
करम-ए-मसनद-ओ-मिम्बरकिअबअरबाब-ए-हकम
ज़ुल्मकरचुकतेहैंतबमर्ज़ी-ए-रबपूछतेहैं
  - Iftikhar Arif
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