KHvaab dekhne waali aañkhen patthar hongi tab sochenge | ख़्वाब देखने वाली आँखें पत्थर होंगी तब सोचेंगे

  - Iftikhar Arif
ख़्वाबदेखनेवालीआँखेंपत्थरहोंगीतबसोचेंगे
सुंदरकोमलध्यानतितलियाँबे-परहोंगीतबसोचेंगे
रसबरसानेवालेबादलऔरतरफ़क्यूँँउड़जातेहैं
हरी-भरीशादाबखेतियाँबंजरहोंगीतबसोचेंगे
बस्तीकीदीवारपेकिसनेअन-होनीबातेंलिखदीहैं
इसअनजानेडरकीबातेंघरघरहोंगीतबसोचेंगे
माँगेकेफूलोंसेकबतकरूप-सरूपकामानबढ़ेगा
अपनेआँगनकीमहकारेंबे-घरहोंगीतबसोचेंगे
बीतीरुतकीसबपहचानेंभूलगएतोफिरक्याहोगा
गएदिनोंकीयादेंजबबे-मंज़रहोंगीतबसोचेंगे
आनेवालेकलकास्वागतकैसेहोगाकौनकरेगा
जलतेहुएसूरजकीकिरनेंसरपरहोंगीतबसोचेंगे
  - Iftikhar Arif
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