ab bhi tauheen-e-ita'at nahin hogii ham se | अब भी तौहीन-ए-इताअत नहीं होगी हम से

  - Iftikhar Arif
अबभीतौहीन-ए-इताअतनहींहोगीहमसे
दिलनहींहोगातोबैअ'तनहींहोगीहमसे
रोज़इकताज़ाक़सीदानईतश्बीबकेसाथ
रिज़्क़बर-हक़हैयेख़िदमतनहींहोगीहमसे
दिलकेमाबूदजबीनोंकेख़ुदाईसेअलग
ऐसेआलममेंइबादतनहींहोगीहमसे
उजरत-ए-इश्क़वफ़ाहैतोहमऐसेमज़दूर
कुछभीकरलेंगेयेमेहनतनहींहोगीहमसे
हरनईनस्लकोइकताज़ामदीनेकीतलाश
साहिबोअबकोईहिजरतनहींहोगीहमसे
सुख़न-आराईकीसूरततोनिकलसकतीहै
परयेचक्कीकीमशक़्क़तनहींहोगीहमसे
  - Iftikhar Arif
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