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Idris Babar
dekha nahin chaand ne palat kar
dekha nahin chaand ne palat kar | देखा नहीं चाँद ने पलट कर
- Idris Babar
देखा
नहीं
चाँद
ने
पलट
कर
हम
सो
गए
ख़्वाब
से
लिपट
कर
अब
दिल
में
वो
सब
कहाँ
है
देखो
बग़दाद
कहानियों
से
हट
कर
शायद
ये
शजर
वही
हो
जिस
पर
देखो
तो
ज़रा
वरक़
उलट
कर
इक
ख़ौफ़-ज़दा
सा
शख़्स
घर
तक
पहुँचा
कई
रास्तों
में
बट
कर
काग़ज़
पे
वो
नज़्म
खिल
उठी
है
उग
आया
है
फिर
दरख़्त
कट
कर
'बाबर'
ये
परिंद
थक
गए
थे
बैठे
हैं
जो
ख़ाक
पर
सिमट
कर
- Idris Babar
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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इस
दुनिया
का
हर
मंसूबा
हर
कोशिश
बेकार
हुई
इक
बच्चे
ने
हाथ
बढ़ाया
चाँद
को
छूकर
देख
लिया
Tariq Qamar
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चाँद
भी
हैरान
दरिया
भी
परेशानी
में
है
अक्स
किस
का
है
कि
इतनी
रौशनी
पानी
में
है
Farhat Ehsaas
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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चंद
उम्मीदें
निचोड़ी
थीं
तो
आहें
टपकीं
दिल
को
पिघलाएँ
तो
हो
सकता
है
साँसें
निकलें
Gulzar
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तेरी
हर
बात
मोहब्बत
में
गवारा
कर
के
दिल
के
बाज़ार
में
बैठे
हैं
ख़सारा
कर
के
आसमानों
की
तरफ़
फेंक
दिया
है
मैं
ने
चंद
मिट्टी
के
चराग़ों
को
सितारा
कर
के
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Rahat Indori
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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तुम
भी
लिखना
तुम
ने
उस
शब
कितनी
बार
पिया
पानी
तुम
ने
भी
तो
छज्जे
ऊपर
देखा
होगा
पूरा
चाँद
Nida Fazli
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उस
की
जानिब
से
भी
चाहा
है
बराबर
ख़ुद
को
मैंने
इक-तरफ़ा
मुहब्बत
तो
कभी
की
ही
नहीं
Idris Babar
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दरिया
वो
कहाँ
रहा
है
जो
था
ये
शहर
का
आख़िरी
क़िस्सा-गो
था
जो
ख़ाक
सी
दिल
में
उड़
रही
है
याँ
कोई
ग़ज़ाल
हो
न
हो
था
अब
से
ये
हमारा
घर
नहीं
ख़ैर
पहले
भी
न
था
ख़याल
तो
था
साबित
नहीं
कर
सकोगे
तुम
लोग
क्या
मेरा
वजूद
था
चलो
था
दोनों
घड़ियों
पर
हिज्र
का
वक़्त
होना
नहीं
चाहिए
था
सो
था
इस
ख़्वाब
में
क्या
नहीं
दर-अस्ल
बस
कह
तो
दिया
ना
ख़्वाब
जो
था
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Idris Babar
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मेरी
दुनिया
में
कोई
चीज़
ठिकाने
पे
नहीं
बस
तुझे
देख
के
लगता
है
कि
सब
अच्छा
है
Idris Babar
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उसका
नंबर
नहीं
किसी
ने
लिया
सब
समझते
रहे
परी
होगी
Idris Babar
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यूँँही
आती
नहीं
हवा
मुझ
में
अभी
रौशन
है
इक
दिया
मुझ
में
वो
मुझे
देख
कर
ख़मोश
रहा
और
इक
शोर
मच
गया
मुझ
में
दोनों
आदम
के
मुंतक़िम
बेटे
और
हुआ
उन
का
सामना
मुझ
में
मैं
मदीने
को
लौट
आया
हूँ
यानी
जारी
है
कर्बला
मुझ
में
रौशनी
आने
वाले
ख़्वाब
की
है
दिन
तो
कब
का
गुज़र
चुका
मुझ
में
इस
अँधेरे
में
जब
कोई
भी
न
था
मुझ
से
गुम
हो
गया
ख़ुदा
मुझ
में
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Idris Babar
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