तिरेख़यालकीजन्नतमेंखोगयाहूँमैं
अबअपनेआपकोरहरहकेढूँढताहूँमैं
हुजूम-ए-शोरिश-ए-जल्वासेआश्नाहूँमैं
इकअजनबीसाअलगदूरजाखड़ाहूँमैं
हरीम-ए-नाज़मेंबे-वक़्तआगयायेबजा
हुज़ूरसोचेंतोक्याकोईदूसराहूँमैं
शब-ए-फ़िराक़मेंइकआसलेकेवा'दोंकी
चराग़-ए-अश्कलिएराहपरखड़ाहूँमैं
तशद्दुदग़म-ए-हस्तीवोदेकेसबनग़्में
'ख़लील'आजतोइकसाज़-ए-बे-सदाहूँमैं