jism ke khol men ik shehr-e-ana rakha hai | जिस्म के ख़ोल में इक शहर-ए-अना रक्खा है

  - Ibn-e-Ummeed
जिस्मकेख़ोलमेंइकशहर-ए-अनारक्खाहै
नामजीवनकातभीहमनेसज़ारक्खाहै
हममकीनोंकोनहींकोईख़ुशीसेमतलब
फ़ैसलाशहरकेवालीनेसुनारक्खाहै
ख़ुशियाँजाबैठींकहींऊँचीसीइकटहनीपर
दिलकेबहलानेकोइकलफ़्ज़-ए-क़ज़ारक्खाहै
आँखोंमेंख़्वाबचुभनसोनेनहींदेतीहै
एकमुद्दतसेहमेंतूनेजगारक्खाहै
जिनकोइंसानभीकहनानहींजचता'फ़र्रुख़'
उनकोमाबूदज़मानेनेबनारक्खाहै
  - Ibn-e-Ummeed
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