is shahar ke logon pe khatm sahi khoo-tal'ati-o-gul-pairhani | इस शहर के लोगों पे ख़त्म सही ख़ु-तलअ'ती-ओ-गुल-पैरहनी

  - Ibn E Insha
इसशहरकेलोगोंपेख़त्मसहीख़ु-तलअ'ती-ओ-गुल-पैरहनी
मिरेदिलकीतोप्यासकभीबुझीमिरेजीकीतोबातकभीबनी
अभीकलहीकीबातहैजान-ए-जहाँयहाँफ़ीलकेफ़ीलथेशोर-कुनाँ
अबनारा-ए-इश्क़ज़र्ब-ए-फ़ुग़ाँगएकौननगरवोवफ़ाकेधनी
कोईऔरभीमोरिद-ए-लुत्फ़हुआमिलीअहल-ए-हवसकोहवसकीसज़ा
तिरेशहरमेंथेहमींअहल-ए-वफ़ामिलीएकहमींकोजला-वतनी
येतोसचहैकिहमतुझेपासकेतिरीयादभीजीसेभुलासके
तिरादाग़हैदिलमेंचराग़-ए-सिफ़ततिरेनामकीज़ेब-ए-गुलू-कफ़नी
तुमसख़्ती-ए-राहकाग़मकरोहरदौरकीराहमेंहम-सफ़रो
जहाँदश्त-ए-ख़िज़ाँवहींवादी-ए-गुलजहाँधूपकड़ीवहाँछाँवघनी
इसइश्क़केदर्दकीकौनदवामगरएकवज़ीफ़ाहैएकदु'आ
पढ़ो'मीर'-ओ-'कबीर'केबैतकबितसुनोशे'र-ए-'नज़ीर'फ़क़ीर-ओ-ग़नी
  - Ibn E Insha
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