zaKHm gehre hon agar to muskurana seekh lo | ज़ख़्म गहरे हों अगर तो मुस्कुराना सीख लो

  - SAAGAR SINGH RAJPUT
ज़ख़्मगहरेहोंअगरतोमुस्कुरानासीखलो
यादकरनाबादमेंपहलेभुलानासीखलो
पानखानेमेंमज़ाआतानहींचूनाकेबिन
ज़िंदगीभीपानहैचूनालगानासीखलो
इश्क़भीइकजंगहैऔरजंगहैगरजीतनी
दिलरुबाकेसामनेसरकोझुकानासीखलो
मानभीमिलजाएगासम्मानभीमिलजाएगा
हाकिमोंकीहाँमेंहाँयारोमिलानासीखलो
आजभीरावणविभीषणहैंघरोंमेंदोस्तों
एकसेकुलएकसेघरकोबचानासीखलो
मशवराइककामकादेताहूँतुमकोआजमैं
पासरहनाहैअगरतोदूरजानासीखलो
इश्क़करनाहैबहुतआसानदुनियामेंमगर
इश्क़करनेसेबहुतपहलेनिभानासीखलो
ज़िंदगीकबतकगुज़ारोगेकिसीसेमाँगकर
इसलिएसागरज़रातुमभीकमानासीखलो
  - SAAGAR SINGH RAJPUT
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy