ghar kii qismat men dhhana tha yaaro | घर की क़िस्मत में ढहना था यारो

  - SAAGAR SINGH RAJPUT
घरकीक़िस्मतमेंढहनाथायारो
ग़मबर्बादीकासहनाथायारो
मेरालिक्खाजोदुनियापढ़तीहै
बसइकलड़कीसेकहनाथायारो
उसदिलनेमुझकोदिलसेठुकराया
जिसदिलमेंमुझकोरहनाथायारो
सागरठहराहैसागरकेजैसे
सागरकोतोबसबहनाथायारो
  - SAAGAR SINGH RAJPUT
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