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SAAGAR SINGH RAJPUT
vo be-wafa thii vo be-wafa hai
vo be-wafa thii vo be-wafa hai | वो बे-वफ़ा थी वो बे-वफ़ा है
- SAAGAR SINGH RAJPUT
वो
बे-वफ़ा
थी
वो
बे-वफ़ा
है
सब
सेे
बड़ी
ये
उसकी
ख़ता
है
दिल
तोड़
कर
वो
ख़ुश
है
रहे
ख़ुश
मेरी
तरफ़
से
उस
को
दु'आ
है
धोखा
उसे
भी
दे
जाए
कोई
उसके
लिए
मेरी
बद्दुआ
है
उसका
नहीं
हो
कोई
जहाँ
में
उसके
लिए
बस
ये
ही
सज़ा
है
हालात
मेरे
अच्छे
नहीं
हैं
ये
दुश्मनों
को
कैसे
पता
है
उसको
दिया
है
सम्मान
मैं
ने
सम्मान
जिस
सेे
मुझको
मिला
है
जो
बा-वफ़ा
है
'आशिक़
जहाँ
में
हर
बे-वफ़ा
उस
सेे
ही
ख़फ़ा
है
सब
लोग
समझो
आए
समझ
तो
मिल
कर
रहो
इस
में
ही
भला
है
मेरा
नहीं
है
कोई
जहाँ
में
शायद
वफ़ा
की
ये
ही
सज़ा
है
मेरा
नमन
वो
स्वीकार
कर
लें
जिनके
दिलों
में
सच
में
दया
है
है
पूजने
के
क़ाबिल
वही
दिल
मेरे
बराबर
जो
दिल
जला
है
कोई
दिवाना
है
क्यूँँ
दिवाना
कोई
दिवाने
से
पूछता
है
मैं
हूँ
सिटी
में
पर
गाँव
मेरा
अब
रात
दिन
रस्ता
देखता
है
मिल
कर
रहो
सब
वरना
जहाँ
में
है
कौन
कब
तक
किस
को
पता
है
'सागर'
तिरा
बस
तेरा
रहेगा
'सागर'
तिरा
बस
तुझको
मिला
है
- SAAGAR SINGH RAJPUT
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जिसको
मुहब्बत
से
मुहब्बत
है
नहीं
वो
शख़्स
ज़ेहनी
तौर
पे
बीमार
है
उसकी
जबीं
चूमो
उसे
तुम
प्यार
दो
बस
प्यार
ही
बीमार
का
उपचार
है
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चाँद
जैसे
नूर
सी
बस
ज़रा
मग़रूर
सी
आज
मैंने
देख
ली
एक
लड़की
हूर
सी
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मैं
'आशिक़
हूँ
किसी
भी
हाल
में
मैं
मर
नहीं
सकता
मुहब्बत
के
जो
दुश्मन
हैं
मैं
उन
सेे
डर
नहीं
सकता
मिरी
इस
बात
का
मतलब
बहुत
ही
साफ़
है
जानाँ
सिवा
तेरे
किसी
से
मैं
मुहब्बत
कर
नहीं
सकता
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जो
तिरी
ख़ातिर
बुरे
हैं
वो
मिरी
ख़ातिर
भले
हैं
हाथ
धो
के
लोग
पीछे
हम
शरीफ़ों
के
पड़े
हैं
इश्क़
में
धोखा
मिला
है
आज
कल
हम
रो
रहे
हैं
बात
फिर
करते
नहीं
हम
जब
किसी
से
रूठते
हैं
दुश्मनी
में
भी
मज़ा
है
ये
भी
करके
देखते
हैं
हादिसा
इक
हो
गया
है
इश्क़
इसको
बोलते
हैं
जल
चुका
है
बाग़
पूरा
पेड़
फिर
भी
सब
हरे
हैं
शाम
अब
ढलने
लगी
है
बोतलें
अब
खोलते
हैं
फिर
नहीं
जैसे
मिलेगी
मय
सभी
यूँँ
पी
रहे
हैं
इश्क़
जिन
से
हो
गया
है
वो
रक़ीबों
से
घिरे
हैं
हम
वफ़ा
उस
से
करेंगे
बे-वफ़ा
जिस
से
भले
हैं
इश्क़
करने
का
तरीक़ा
लोग
हम
से
सीखते
हैं
शब
सुहानी
आज
की
है
खेल
आओ
खेलते
हैं
आज
बिछड़े
जान
तुम
सेे
साल
सत्रह
हो
गए
हैं
इश्क़
तो
है
जानलेवा
पर
सभी
कर
बैठते
हैं
आज
भी
ख़ुश
है
अकेला
यार
'सागर'
के
मज़े
हैं
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तुम
दिल
जला
रहे
हो
मुझको
सता
रहे
हो
बनते
हो
बे-वफ़ा
क्यूँँ
तुम
तो
वफ़ा
रहे
हो
कैसे
सवाल
का
तुम
उत्तर
बता
रहे
हो
ये
सब
नहीं
करो
तुम
क्या
बनते
जा
रहे
हो
मैं
सच
बता
रहा
हूँ
तुम
दिल
दुखा
रहे
हो
इतना
बुरा
नहीं
हूँ
जितना
जला
रहे
हो
'सागर'
का
इश्क़
होकर
सब
से
निभा
रहे
हो
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