hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Shivam Mishra
neend aati hai kam raat men ab mujhe
neend aati hai kam raat men ab mujhe | नींद आती है कम रात में अब मुझे
- Shivam Mishra
नींद
आती
है
कम
रात
में
अब
मुझे
लग
रहा
है
कि
मंज़िल
क़रीब
आ
गई
- Shivam Mishra
Download Sher Image
किताबें,
रिसाले
न
अख़बार
पढ़ना
मगर
दिल
को
हर
रात
इक
बार
पढ़ना
Bashir Badr
Send
Download Image
53 Likes
नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
Send
Download Image
32 Likes
यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
Send
Download Image
21 Likes
मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
53 Likes
इन्हीं
ग़म
की
घटाओं
से
ख़ुशी
का
चाँद
निकलेगा
अँधेरी
रात
के
पर्दे
में
दिन
की
रौशनी
भी
है
Akhtar Shirani
Send
Download Image
21 Likes
गुज़रने
ही
न
दी
वो
रात
मैं
ने
घड़ी
पर
रख
दिया
था
हाथ
मैं
ने
Shahzad Ahmad
Send
Download Image
26 Likes
हर
एक
रात
को
महताब
देखने
के
लिए
मैं
जागता
हूँ
तिरा
ख़्वाब
देखने
के
लिए
Azhar Inayati
Send
Download Image
48 Likes
भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
40 Likes
तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
Send
Download Image
44 Likes
मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
Read Full
Shariq Kaifi
Send
Download Image
58 Likes
Read More
जो
था
क़िस्मत
में
मेरी
वो
मिला
मुझको
न
शिकवा
है
किसी
से
नइँ
गिला
मुझको
Shivam Mishra
Send
Download Image
2 Likes
कोई
नहीं
है
जो
छुआ
हो
रूह
को
चाहत
सभी
को
जिस्म
की
ही
है
रही
Shivam Mishra
Send
Download Image
2 Likes
तंग
आ
गया
मैं
इस
बनावटी
समाज
से
अब
मुझे
भी
सीखना
है
हर
फ़रेब
आज
से
उम्र
ये
तो
कट
रही
है
इंतिज़ार
में
ही
अब
ज़ख़्म
भी
मेरे
थके
हुए
हैं
हर
इलाज
से
याद
दिल
से
कब
किसी
की
कौन
है
मिटा
सका
कौन
है
जो
रौशनी
जुदा
करे
सिराज
से
कौन
है
यक़ीन
कर
रहा
किसी
पे
अब
यहाँ
है
जिसे
यक़ीन
वो
न
बच
सका
रिवाज
से
Read Full
Shivam Mishra
Download Image
2 Likes
चाल
पे
ख़ुद
की
उनको
है
नाज़िश
हुई
देख
गर्दिश
में
मुझको
जो
साज़िश
हुई
Shivam Mishra
Send
Download Image
4 Likes
चुप
रहा
कर
न
ज़ख़्मों
को
शादाब
कर
यूँँ
न
दिख
जा
मुझे
अब
न
आदाब
कर
Shivam Mishra
Send
Download Image
3 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Kismat Shayari
Raasta Shayari
Kanta Shayari
Parinda Shayari
Raaz Shayari