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Himanshu Upadhyay Som
ek hi dard kab talak paaloon
ek hi dard kab talak paaloon | एक ही दर्द कब तलक पालूंँ
- Himanshu Upadhyay Som
एक
ही
दर्द
कब
तलक
पालूंँ
चाहिए
दर्द
अब
नया
मुझको
- Himanshu Upadhyay Som
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ये
काम
दोनों
तरफ़
हुआ
है
उसे
भी
आदत
पड़ी
है
मेरी
Shariq Kaifi
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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मैं
तमाम
दिन
का
थका
हुआ
तू
तमाम
शब
का
जगा
हुआ
ज़रा
ठहर
जा
इसी
मोड़
पर
तेरे
साथ
शाम
गुज़ार
लूँ
Bashir Badr
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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दो
घड़ी
को
पास
आया
था
कोई
दिल
पे
बरसों
हुक्मरानी
कर
गया
Subhan Asad
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मैं
तो
मुद्दत
से
ग़ैर-हाज़िर
हूँ
बस
मेरा
नाम
है
रजिस्टर
में
याद
करती
हैं
तुझको
दीवारें
शक्ल
उभर
आई
है
पलस्तर
में
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Azhar Nawaz
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शब
की
आग़ोश
में
महताब
उतारा
उस
ने
मेरी
आँखों
में
कोई
ख़्वाब
उतारा
उस
ने
Azm Shakri
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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लोग
जो
दिल
के
पास
होते
हैं
दूर
उनके
निवास
होते
हैं
Himanshu Upadhyay Som
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सभी
ने
अपने
अपने
शे'र
छाँटे
ग़ज़ल
जैसे
हो
गुलदस्ता
हमारा
Himanshu Upadhyay Som
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बहुत
सोच
कर
तुम
मुझे
मिलने
आना
बिछड़ना
पड़ेगा
मिलन
बाद
हमको
Himanshu Upadhyay Som
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सूर्य
अपनी
रौशनी
से
चाँद
रौशन
ज्यूँ
करे
तू
भी
अपने
नूर
से
वैसे
ही
रौशन
कर
मुझे
Himanshu Upadhyay Som
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ख़ूब-सूरत
गुलाब
सी
लड़की
हमने
देखी
है
ख़्वाब
सी
लड़की
बाल
हैं
स्याह
रात
के
जैसे
रुख़
से
है
माहताब
सी
लड़की
राज़
ख़ुद
में
कई
समेटे
हुए
बंद
है
वो
किताब
सी
लड़की
प्यार
ऊँचाइयों
से
है
उसको
उड़ती
फिरती
उक़ाब
सी
लड़की
सब
मुसाफिर
हैं
इक
मरुस्थल
के
और
वो
है
यख़
आब
सी
लड़की
एक
लम्हें
में
हो
गई
गायब
एक
दिलकश
सराब
सी
लड़की
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Himanshu Upadhyay Som
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