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Himanshu Upadhyay Som
soory apni raushni se chaand raushan jyon kare
soory apni raushni se chaand raushan jyon kare | सूर्य अपनी रौशनी से चाँद रौशन ज्यूँ करे
- Himanshu Upadhyay Som
सूर्य
अपनी
रौशनी
से
चाँद
रौशन
ज्यूँ
करे
तू
भी
अपने
नूर
से
वैसे
ही
रौशन
कर
मुझे
- Himanshu Upadhyay Som
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ग़ुस्से
में
भींच
लेता
है
बाँहों
में
अपनी
वो
क्या
सोचना
है
फिर
उसे
ग़ुस्सा
दिलाइए
Pooja Bhatia
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बस
ख़ुद-कुशी
से
बचने
का
जरिया
है
शा'इरी
हमको
सुख़न-वरी
से
तो
शोहरत
तलब
नहीं
Sabir Hussain
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इस
बात
पर
तू
हाथ
मिला
अब
तेरी
तरह
ग़म
का
लिबास
ओढ़
के
बैठा
हुआ
हूँ
मैं
shaan manral
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भले
हैं
फ़ासले
क़ुर्बत
से
ख़ौफ़
लगता
है
ये
क्या
बला
है
जो
ऐसी
विरानी
क़ैद
हुई
Prashant Beybaar
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ज़रा
नज़दीक
आकर
सुन
मेरी
इक
बात
ऐ
उर्दू
मेरी
तहरीर
बिन
तेरे
मुकम्मल
हो
नहीं
सकती
Avtar Singh Jasser
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बंसी
सब
सुर
त्यागे
है,
एक
ही
सुर
में
बाजे
है
हाल
न
पूछो
मोहन
का,
सब
कुछ
राधे
राधे
है
Zubair Ali Tabish
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कल
चौदहवीं
की
रात
थी
शब
भर
रहा
चर्चा
तिरा
कुछ
ने
कहा
ये
चाँद
है
कुछ
ने
कहा
चेहरा
तिरा
Ibn E Insha
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न
जाने
कौन
सी
आए
सदा
पसंद
उसे
सो
हम
सदाएँ
बदल
कर
सदाएँ
देते
रहे
Varun Anand
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उम्र
से
मेरी
फ़नकारी
को
मत
आँको
उस्तादों
से
बेहतर
ग़ज़लें
कहता
हूँ
Harsh saxena
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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बहुत
सोच
कर
तुम
मुझे
मिलने
आना
बिछड़ना
पड़ेगा
मिलन
बाद
हमको
Himanshu Upadhyay Som
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उसे
फिर
याद
करने
में
लगे
हो
समय
बर्बाद
करने
में
लगे
हो
ख़ुदा
सुनते
नहीं
हैं
आज
कल
के,
कहाँ
फरियाद
करने
में
लगे
हो
उदासी
रख
के
तुम
अपने
लबों
पर,
गुलों
को
शाद
करने
में
लगे
हो
तुम्हारी
ही
कहानी
कह
रहा
हूँ,
तुम्हीं
इरशाद
करने
में
लगे
हो
वही
बर्बाद
कर
देगा
तुम्हें
"सोम",
जिसे
आबाद
करने
में
लगे
हो
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Himanshu Upadhyay Som
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ये
जहाँ
है
हिसार
औरत
का
है
सभी
पर
उधार
औरत
का
खूबियाँ
और
भी
हैं
उस
में
पर
सबने
देखा
निखार
औरत
का
आदमी
को
तो
फिर
भी
छुट्टी
है
रह्न
है
पर
करार
औरत
का
रौनक़े
घर
की
सब
इन्हीं
से
हैं
घर
करे
इंतिज़ार
औरत
का
जन्म
औरत
की
कोख
से
लेकर
मर्द
करते
शिकार
औरत
का
घर
में
सब
का
ख़्याल
रखती
है
है
यही
रोज़गार
औरत
का
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Himanshu Upadhyay Som
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लोग
जो
दिल
के
पास
होते
हैं
दूर
उनके
निवास
होते
हैं
Himanshu Upadhyay Som
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हो
अकेले
तो
इस
में
ग़म
क्या
है,
दीप
में
रहता
है
गुहर
तन्हा
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Himanshu Upadhyay Som
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