gamon ke paas ja kar baithe hain ham | ग़मों के पास जा कर बैठे हैं हम

  - Himanshu Upadhyay Som
ग़मोंकेपासजाकरबैठेहैंहम
ख़ुशीसेलड़लड़ाकरबैठेहैंहम
सज़ाओंपरसज़ाएँमिलरहीहैं,
जानेक्याख़ताकरबैठेहैंहम
किसीकोफ़ायदाहोइसलिएबस,
बहुतनुक़सानखाकरबैठेहैंहम
कुछइंसानोंकोख़ुशकरनेकीख़ातिर,
ख़ुदाकोहीख़फ़ाकरबैठेहैंहम
मेरेअश्कोंअभीथमजाओकुछपल,
अभीतोमुस्कुराकरबैठेहैंहम
कोईदेखेधुआँ,आएबचाने,
यहाँहुक्काजलाकरबैठेहैंहम
किरायामाँगताहैवोहरमका,
जिसेदिलमेंबसाकरबैठेहैंहम
ज़रासाप्रेमपानेकेलिएबस,
अनाअपनीगँवाकरबैठेहैंहम
वोमाथादेखकरलौटेहैंवापस,
मकाँअंदरसजाकरबैठेहैंहम
येमहफ़िल"सोम"हीलूटेगासाहब,
सरेमहफ़िलबताकरबैठेहैंहम
  - Himanshu Upadhyay Som
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