hai mashq-e-sukhan jaarii chakki ki mashqat bhi | है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी

  - Hasrat Mohani
हैमश्क़-ए-सुख़नजारीचक्कीकीमशक़्क़तभी
इकतुर्फ़ातमाशाहै'हसरत'कीतबीअतभी
जोचाहोसज़ादेलोतुमऔरभीखुलखेलो
परहमसेक़समलेलोकीहोजोशिकायतभी
दुश्वारहैरिंदोंपरइंकार-ए-करमयकसर
साक़ी-ए-जाँ-परवरकुछलुत्फ़-ओ-इनायतभी
दिलबस-किहैदीवानाउसहुस्न-ए-गुलाबीका
रंगींहैउसीरूसेशायदग़म-ए-फ़ुर्क़तभी
ख़ुदइश्क़कीगुस्ताख़ीसबतुझकोसिखादेगी
हुस्न-ए-हया-परवरशोख़ीभीशरारतभी
बरसातकेआतेहीतौबारहीबाक़ी
बादलजोनज़रआएबदलीमेरीनीयतभी
उश्शाक़केदिलनाज़ुकउसशोख़कीख़ूनाज़ुक
नाज़ुकइसीनिस्बतसेहैकार-ए-मोहब्बतभी
रखतेहैंमिरेदिलपरक्यूँँतोहमत-ए-बेताबी
याँनाला-ए-मुज़्तरकीजबमुझमेंहोक़ुव्वतभी
शौक़कीबेबाकीवोक्यातेरीख़्वाहिशथी
जिसपरउन्हेंग़ुस्साहैइंकारभीहैरतभी
हर-चंदहैदिलशैदाहुर्रियत-ए-कामिलका
मंज़ूर-ए-दुआलेकिनहैक़ैद-ए-मोहब्बतभी
हैं'शाद''सफ़ी'शाइरया'शौक़''वफ़ा''हसरत'
फिर'ज़ामिन''महशर'हैं'इक़बाल'भी'वहशत'भी
  - Hasrat Mohani
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