rabt-e-husn-o-ishq azal se saccha ye afsaana hai | रब्त-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ अज़ल से सच्चा ये अफ़्साना है

  - Haidar Husain Fiza Lucknowi
रब्त-ए-हुस्न-ओ-इश्क़अज़लसेसच्चायेअफ़्सानाहै
शम्अ'हैजिसमहफ़िलमेंरौशनदेखोवहींपरवानाहै
दिलकेसिवाकुछपासनहींहैदिलतेरानज़रानाहै
यादतिरीरहनेकोहमेशाहाज़िरयेकाशानाहै
उसकाचेहरासूरजऐसाउसकाग़मसूरजकीतपिश
चाँदउसेकिसतरहसेकहिएचाँदतोइकवीरानाहै
पासथाजबतूकितनीउमंगेंइसदिलमेंआबादरहीं
जबसेहुआहैमुझसेजुदातूदिलयेनहींवीरानाहै
ग़ैरोंकाहमशिकवाकरेंक्यूँअपनोंनेजबदीहैदग़ा
जिसदिलकोसमझेथेअपनाआजवहीबेगानाहै
दिलकालहूयेआँसूबनकेआँखसेटपटपगिरनेलगा
समझोउसेपानीकाक़तराअश्कनहींदुर्दानाहै
सुनकेमिरीरूदाद-ए-ग़मगींहँसकरबोलावोज़ालिम
लाखोंसुनेहैंऐसेक़िस्सेयेभीइकअफ़्सानाहै
बैठेरहेसबऐरे-ग़ैरेग़ैरथाइकमैंहीजैसे
मुझकोउठायाबज़्मसेउसनेकहकेयेदीवानाहै
बदलीहैगुलशनकीहवाक्यूँबिगड़ामिज़ाज-ए-बुलबुलक्यूँ
अंजुमन-ए-गुलहैअबतरक्यूँसब्ज़ाक्यूँबेगानाहै
अपनेक़दहकीख़ैरमनाकरमय-कशअपनीराहलगे
रिंद-ए-ख़राबातीकेदमसेआबादअबमय-ख़ानाहै
तूहोसलामतदमरहेतेरामय-कदेमेंहैशोर'फ़ज़ा'
आयाआयासाक़ीमेरागर्दिशमेंपैमानाहै
  - Haidar Husain Fiza Lucknowi
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