mire dil ko shauq-e-fughaan nahin mire lab tak aati dua nahin | मिरे दिल को शौक़-ए-फ़ुग़ाँ नहीं मिरे लब तक आती दु'आ नहीं

  - Haidar Ali Aatish
मिरेदिलकोशौक़-ए-फ़ुग़ाँनहींमिरेलबतकआतीदु'आनहीं
वोदहनहूँजिसमेंज़बाँनहींवोजरसहूँजिसमेंसदानहीं
तुझेदिमाग़-ए-निगाहहैकिसीकोताब-ए-जमालहै
उन्हेंकिसतरहसेदिखाऊँमैंवोजोकहतेहैंकिख़ुदानहीं
किसेनींदआतीहैसनमतिरेताक़-ए-अबरूकीयादमें
कभीआश्ना-ए-तह-ए-बग़लसर-ए-मुर्ग़-ए-क़िबला-नुमानहीं
अजबइसकाक्यासमाउँमैंजोख़याल-ए-दुश्मन-ओ-दोस्तहै
वोमक़ामहूँकिगुज़रनहींवोमकानहूँकिपतानहीं
येख़िलाफ़होगयाआसमाँयेहवाज़मानेकीफिरगई
कहींगुलखिलेभीतोबूँदसेकहींहुस्नहैतोवफ़ानहीं
मरज़-ए-जुदाई-ए-यारनेयेबिगाड़दीहैहमारीख़ू
किमुआफ़िक़अपनेमिज़ाजकेनज़रआतीकोईदवानहीं
मुझेज़ाफ़रानसेज़र्द-तरग़म-ए-हिज्र-ए-यारनेकरदिया
नहींऐसाकोईज़मानेमेंमिरेहालपरजोहँसानहीं
मिरेआगेउसकोफ़रोग़होयेमजालक्याहैरक़ीबकी
येहुजूम-ए-जल्वा-ए-यारहैकिचराग़-ए-ख़ानाकोजानहीं
चलेंगोकिसैकड़ोंआँधियाँजलेंगरचेलाखघरफ़लक
भड़कउठ्ठे'आतिश'-ए-तूरफिरकोईइसतरहकीदवानहीं
  - Haidar Ali Aatish
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