patthar men fan ke phool khila kar chala gaya | पत्थर में फ़न के फूल खिला कर चला गया

  - Hafiz Taib
पत्थरमेंफ़नकेफूलखिलाकरचलागया
कैसेअमिटनुक़ूशकोईछोड़तागया
सिमटातिराख़यालतोगुल-रंगअश्कथा
फैलातोमिस्ल-ए-दश्त-ए-वफ़ाफैलतागया
सोचोंकीगूँजथीकिक़यामतकीगूँजथी
तेरासुकूतहश्रकेमंज़रदिखागया
यातेरीआरज़ूमुझेलेआईइसतरफ़
यामेराशौक़राहमेंसहराबिछागया
वोजिसकोभूलनेकातसव्वुरमुहालथा
वोअहदरफ़्तारफ़्तामुझेभूलतागया
जबउसकोपास-ए-ख़ातिर-ए-आज़ुर्दगाँनहीं
मुड़मुड़केक्यूँँवोदूरतलकदेखतागया
  - Hafiz Taib
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