lafz se jab na utha baar-e-khayaal | लफ़्ज़ से जब न उठा बार-ए-ख़याल

  - Hafiz Taib
लफ़्ज़सेजबउठाबार-ए-ख़याल
कैसेकैसेकियाइज़हार-ए-ख़याल
दिलमेंजबदर्दकीक़िंदीलजली
तमतमानेलगेरुख़्सार-ए-ख़याल
रूहकेज़ख़्ममुरझाएँकभी
ता-अबदमहकेचमनज़ार-ए-ख़याल
ग़मपेमौक़ूफ़हैतासीर-ए-बयाँ
ग़मसेहैरौनक़-ए-बाज़ार-ए-ख़याल
राकिब-ए-फ़हमहैबे-बस'ताइब'
औरमुँह-ज़ोरहैरहवार-ए-ख़याल
  - Hafiz Taib
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