subh ko aa.e ho nikle shaam ke | सुब्ह को आए हो निकले शाम के

  - Hafeez Jaunpuri
सुब्हकोआएहोनिकलेशामके
जाओभीअबतुममिरेकिसकामके
हाथा-पाईसेयहीमतलबभीथा
कोईमुँहचू
मेंकलाईथामके
तुमअगरचाहोतोकुछमुश्किलनहीं
ढंगसौहैंनामा-ओ-पैग़ामके
छेड़वाइज़हरघड़ीअच्छीनहीं
रिंदभीहैंएकअपनेनामके
क़हरढाएगीअसीरोंकीतड़प
औरभीउलझेंगेहल्क़ेदामके
मोहतसिबचुनलेनेदेइकइकमुझे
दिलकेटुकड़ेहैंयेटुकड़ेजामके
लाखोंधड़केइब्तिदा-ए-इश्क़में
ध्यानहैंआग़ाज़मेंअंजामके
मयकाफ़तवातोसहीक़ाज़ीसेलूँ
टोककररस्तेमेंदामनथामके
दूरदौर-ए-मोहतसिबहैआज-कल
अबकहाँवोदौर-दौरेजामके
नामजबउसकाज़बाँपरगया
रहगयानासेहकलेजाथामके
दूरसेनालेमिरेसुनकरकहा
गएदुश्मनमिरेआरामके
हाएवोअबप्यारकीबातेंकहाँ
अबतोलालेहैंमुझेदुश्नामके
वोलगाएँक़हक़हेसुनकर'हफ़ीज़'
आपनालेकीजिएदिलथामके
  - Hafeez Jaunpuri
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