arz-e-hunar bhi vajh-e-shikaayaat ho gaii | अर्ज़-ए-हुनर भी वज्ह-ए-शिकायात हो गई

  - Hafeez Jalandhari
अर्ज़-ए-हुनरभीवज्ह-ए-शिकायातहोगई
छोटासामुँहथामुझसेबड़ीबातहोगई
दुश्नामकाजवाबसूझाब-जुज़-सलाम
ज़ाहिरमिरेकलामकीऔक़ातहोगई
देखाजोखाकेतीरकमीं-गाहकीतरफ़
अपनेहीदोस्तोंसेमुलाक़ातहोगई
याज़रबत-ए-ख़लीलसेबुत-ख़ानाचीख़उठा
यापत्थरोंकोमअरिफ़त-ए-ज़ातहोगई
यरान-ए-बे-बिसातकिहरबाज़ी-ए-हयात
खेलेबग़ैरहारगएमातहोगई
बे-रज़्मदिनगुज़ारलियारतजगामनाओ
अहल-ए-बज़्मजागउठोरातहोगई
निकलेजोमय-कदेसेतोमस्जिदथाहरमक़ाम
हरगामपरतलाफ़ी-ए-माफ़ातहोगई
हद्द-ए-अमलमेंथीतोअमलथीयहीशराब
रद्द-ए-अमलबनीतोमुकाफ़ातहोगई
अबशुक्रना-क़ुबूलहैशिकवाफ़ुज़ूलहै
जैसेभीहोगईबसर-औक़ातहोगई
वोख़ुश-नसीबतुमसेमुलाक़ातक्यूँँकरे
दरबानहीसेजिसकीमुदारातहोगई
हरएकरहनुमासेबिछड़नापड़ामुझे
हरमोड़परकोईकोईघातहोगई
यारोंकीबरहमीपेहँसीगई'हफ़ीज़'
येमुझसेएकऔरबुरीबातहोगई
  - Hafeez Jalandhari
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