khayal-o-khwaab ki zulfen sanwaar thodii der | ख़याल-ओ-ख़्वाब की ज़ुल्फ़ें सँवार थोड़ी देर

  - Hafeez Betab
ख़याल-ओ-ख़्वाबकीज़ुल्फ़ेंसँवारथोड़ीदेर
अभीहैऔरशब-ए-इंतिज़ारथोड़ीदेर
मोहब्बतोंकेयेपैकरयेदोस्तीकेअमीन
वफ़ाकेहोतेहैंसबपासदारथोड़ीदेर
अभीरोकिएइनआँसुओंकोपलकोंपर
निकलनेदीजिएदिलकाग़ुबारथोड़ीदेर
तमामउम्ररहाउसकाइंतिज़ारमुझे
जोकहगयाथाकरोइंतिज़ारथोड़ीदेर
बनारहूँमैंतमाशा-ए-आरज़ूकबतक
अज़ाबमुझपेख़ुदायाउतारथोड़ीदेर
ज़रूरपिघलेंगीयख़-बस्तावादियाँ'बेताब'
रुकेतोधूपसर-ए-कोहसारथोड़ीदेर
  - Hafeez Betab
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