ज़र्रेहीसहीकोहसेटकरातोगएहम
दिललेकेसर-ए-अर्सा-ए-ग़मआतोगएहम
अबनामरहेयानरहेइश्क़मेंअपना
रूदाद-ए-वफ़ादारपेदोहरातोगएहम
कहतेथेजोअबकोईनहींजाँसेगुज़रता
लोजाँसेगुज़रकरउन्हेंझुटलातोगएहम
जाँअपनीगँवाकरकभीघरअपनाजलाकर
दिलउनकाहरइकतौरसेबहलातोगएहम
कुछऔरहीआलमथापस-ए-चेहरा-ए-याराँ
रहताजोयूँँहीराज़उसेपातोगएहम
अबसोचरहेहैंकियेमुमकिनहीनहींहै
फिरउनसेनमिलनेकीक़समखातोगएहम
उट्ठेंकिनउट्ठेंयेरज़ाउनकीहै'जालिब'
लोगोंकोसर-ए-दारनज़रआतोगएहम