dil-e-pur-shauq ko pahluu men dabaye rakha | दिल-ए-पुर-शौक़ को पहलू में दबाए रक्खा

  - Habib Jalib
दिल-ए-पुर-शौक़कोपहलूमेंदबाएरक्खा
तुझसेभीहमनेतिराप्यारछुपाएरक्खा
छोड़इसबातकोदोस्तकितुझसेपहले
हमनेकिसकिसकोख़यालोंमेंबसाएरक्खा
ग़ैरमुमकिनथीज़मानेकेग़मोंसेफ़ुर्सत
फिरभीहमनेतिराग़मदिलमेंबसाएरक्खा
फूलकोफूलकहतेसोउसेक्याकहते
क्याहुआग़ैरनेकॉलरपेसजाएरक्खा
जानेकिसहालमेंहैंकौनसेशहरोंमेंहैंवो
ज़िंदगीअपनीजिन्हेंहमनेबनाएरक्खा
हाएक्यालोगथेवोलोगपरी-चेहरालोग
हमनेजिनकेलिएदुनियाकोभुलाएरक्खा
अबमिलेंभीतोपहचानसकेंहमउनको
जिनकोइकउम्रख़यालोंमेंबसाएरक्खा
  - Habib Jalib
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