har ek gham nichod ke har ik baras ji.e | हर एक ग़म निचोड़ के हर इक बरस जिए

  - Gulzar
हरएकग़मनिचोड़केहरइकबरसजिए
दोदिनकीज़िंदगीमेंहज़ारोंबरसजिए
सदियोंपेइख़्तियारनहींथाहमारादोस्त
दोचारलम्हेबसमेंथेदोचारबसजिए
सहराकेउसतरफ़सेगएसारेकारवाँ
सुनसुनकेहमतोसिर्फ़सदा-ए-जरसजिए
होंटोंमेंलेकेरातकेआँचलकाइकसिरा
आँखोंपेरखकेचाँदकेहोंटोंकामसजिए
महदूदहैंदुआएँमिरेइख़्तियारमें
हरसाँसपुर-सुकूनहोतूसौबरसजिए
  - Gulzar
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