shauq barhana-pa chaltaa tha aur raaste pathreeli the | शौक़ बरहना-पा चलता था और रस्ते पथरीले थे

  - Ghulam Mohammad Qasir
शौक़बरहना-पाचलताथाऔररस्तेपथरीलेथे
घिसतेघिसतेघिसगएआख़िरकंकरजोनोकीलेथे
ख़ार-ए-चमनथेशबनमशबनमफूलभीसारेगीलेथे
शाख़सेटूटकेगिरनेवालेपत्तेफिरभीपीलेथे
सर्दहवाओंसेतोथेसाहिलकेरेतकेयाराने
लूकेथपेड़ेसहनेवालेसहराओंकेटीलेथे
ताबिंदातारोंकातोहफ़ासुब्हकीख़िदमतमेंपहुँचा
रातनेचाँदकीनज़्रकिएजोतारेकमचमकीलेथे
सारेसपेरेवीरानोंमेंघूमरहेहैंबीनलिए
आबादीमेंरहनेवालेसाँपबड़ेज़हरीलेथे
तुमयूँँहीनाराज़हुएहोवर्नामय-ख़ानेकापता
हमनेहरउसशख़्ससेपूछाजिसकेनैननशीलेथे
कौनग़ुलाममोहम्मद'क़ासिर'बेचारेसेकरताबात
येचालाकोंकीबस्तीथीऔरहज़रतशर्मीलेथे
  - Ghulam Mohammad Qasir
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