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Ghulam Abbas
gudiya hamaari
gudiya hamaari | गुड़िया हमारी
- Ghulam Abbas
गुड़िया
हमारी
है
प्यारी
प्यारी
गुड़िया
ने
पहने
फूलों
के
गहने
गुड़िया
ने
ओढ़ी
गोटे
की
चुनरी
गुड़िया
ने
देखे
मेले
तमाशे
गुड़िया
ने
खाए
खीलें
बताशे
गुड़िया
की
सूरत
चीनी
की
मूरत
गुड़िया
की
पलकें
गालों
पे
झलकें
गुड़िया
है
सोई
ख़्वाबों
में
खोई
गुड़िया
है
हँसती
गुड़िया
है
रोती
गुड़िया
से
खेलूँ
गोदी
में
ले
लूँ
गुड़िया
ने
रक्खा
कल
पहला
रोज़ा
गुड़िया
ये
मेरी
छोटी
बहन
है
- Ghulam Abbas
धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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बड़े
नादान
हो
तुम
भी
ज़रा
समझा
करो
बातें
गले
मिलकर
जो
रोती
है
बिछड़कर
कितना
रोएगी
Ankita Singh
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सुनते
हैं
इश्क़
नाम
के
गुज़रे
हैं
इक
बुज़ुर्ग
हम
लोग
भी
फ़क़ीर
इसी
सिलसिले
के
हैं
Firaq Gorakhpuri
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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तुम
भी
रोती
हुई
दिखाई
दो
मैंने
रोते
हुए
ये
चाहा
था
Vikas Rana
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ग़रीब
लोग
कहाँ
ख़ुद
को
बचा
पाएँगे
वबास
बच
भी
गए
भूख
से
मर
जाएँगे
Astitwa Ankur
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इसी
लिए
तो
है
ज़िंदाँ
को
जुस्तुजू
मेरी
कि
मुफ़लिसी
को
सिखाई
है
सर-कशी
मैं
ने
Ali Sardar Jafri
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शराब
खींची
है
सब
ने
ग़रीब
के
ख़ूँ
से
तू
अब
अमीर
के
ख़ूँ
से
शराब
पैदा
कर
तू
इंक़लाब
की
आमद
का
इंतिज़ार
न
कर
जो
हो
सके
तो
अभी
इंक़लाब
पैदा
कर
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Asrar Ul Haq Majaz
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