masafat ki garaan har ek sa'at toot jaati hai | मसाफ़त की गराँ हर एक साअ'त टूट जाती है

  - Ghufran Amjad
मसाफ़तकीगराँहरएकसाअ'तटूटजातीहै
तिरीचश्म-ए-इनायतसेअज़िय्यतटूटजातीहै
तिरीयादोंकीसूरतसेनिकलतीहैअजबसूरत
उजालेयूँँबरसतेहैंकिज़ुल्मतटूटजातीहै
सदा-ए-हक़-शनासीगश्तकरतीरहतीहैलेकिन
ज़मानायेसमझताहैसदाक़तटूटजातीहै
बरा-ए-जज़्बा-साज़ीकुछदिखावाहोमगरयारो
रिया-कारीबरतनेसेइबादतटूटजातीहै
ग़ज़लमेंजिद्दत-ओ-नुदरतज़रूरीहैबहुत'अमजद'
मगरफ़न्नीबुख़ालतसेसलासतटूटजातीहै
  - Ghufran Amjad
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