saare gulshan men mira koi bhi dam-saaz nahin | सारे गुलशन में मिरा कोई भी दम-साज़ नहीं

  - Ghubar Kiratpuri
सारेगुलशनमेंमिराकोईभीदम-साज़नहीं
चलतेफिरतेहैंयेसाएमगरआवाज़नहीं
येहक़ीक़तहैखुलीइसमेंकोईराज़नहीं
तूवहीहैमगरअस्लाफ़केअंदाज़नहीं
बे-नियाज़आजभीचश्म-ए-करम-अंदाज़नहीं
ग़मकरतूदर-ए-मय-ख़ानाअगरबाज़नहीं
साज़हरदौरमेंबनतेहैंतक़ाज़ोंकेतहत
साज़-ए-हस्तीहोनयाफिरभीनयासाज़नहीं
इसहक़ीक़तकोसमझतेहैंसमझनेवाले
राज़-ए-फ़ितरतहैयेइंसानमगरराज़नहीं
हैवोइसदर्जामुकर्रमकिनहींजिसकाहिसाब
ख़ालिक़-ए-कौन-ओ-मकाँहैबुत-ए-तन्नाज़नहीं
सर-बुलंदीहमेंमिलसकतीहैलेकिन'ग़ुबार'
आजमिल्लतकेजवानोंमेंतग-ओ-ताज़नहीं
  - Ghubar Kiratpuri
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