tasalli ko hamaari baagbaan kuchh aur kahtaa hai | तसल्ली को हमारी बाग़बाँ कुछ और कहता है

  - Ghubaar Bhatti
तसल्लीकोहमारीबाग़बाँकुछऔरकहताहै
गुलिस्ताँसेमगरउड़ताधुआँकुछऔरकहताहै
बहमकुछसाज़िशेंफिरहोरहीहैंबर्क़-ओ-बाराँमें
हरइकताइरसेलेकिनआशियाँकुछऔरकहताहै
समझतेहैंख़ुदा-मा'लूमक्याकुछकारवाँवाले
ज़बाँमेंअपनीमीर-ए-कारवाँकुछऔरकहताहै
फूलोइसतरहसेनग़्मा-ए-मुर्ग़-ए-ख़ुश-इल्हाँपर
तुम्हेंआवाज़ा-ए-बांग-ए-अज़ाँकुछऔरकहताहै
मगरमहरूमज़ाहिदहोगयाहैगोश-ए-शनवासे
उसेबुत-ख़ानेमेंहुस्न-ए-बुताँकुछऔरकहताहै
येख़ुश-फ़हमीकिकुछसमझेहुएहैंअंजुमनवाले
मगरहरइकसेरंग-ए-दास्ताँकुछऔरकहताहै
ठहरजाहाँठहरजाजानेवालेइसकोसुनताजा
ब-हाल-नज़्अ'तेरानीम-जाँकुछऔरकहताहै
मुख़ालिफ़उसकेकुछकुछरहीहैंदिलकीआवाज़ें
मगरहमसेहिजाब-ए-दरमियाँकुछऔरकहताहै
रहनाचाहिएगुलशनमेंमरऊब-ए-ख़िज़ाँहोकर
किहमसेआजरंग-ए-गुलिस्ताँकुछऔरकहताहै
  - Ghubaar Bhatti
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