ajab inqilaab ka daur hai ki har ek samt fishaar haina kahii khird ko sukoon hai na kahii junoon ko qaraar hai | अजब इंक़लाब का दौर है कि हर एक सम्त फ़िशार है

  - Ghubaar Bhatti
अजबइंक़लाबकादौरहैकिहरएकसम्तफ़िशारहै
कहींख़िरदकोसुकूनहैकहींजुनूँकोक़रारहै
कहींगर्मबज़्म-ए-हबीबहैकहींसर्दमहफ़िल-ए-यारहै
कहींइब्तिदा-ए-सुरूरहैकहींइंतिहा-ए-ख़ुमारहै
मिरादिलहैसीनेमेंरौशनीइसीरौशनीपेमदारहै
मैंमुसाफ़िर-ए-रह-ए-इश्क़हूँतोयेशम्अ'राह-गुज़ारहै
जिसेकहतेहैंतिरीअंजुमनअजबअंजुमनहैयेअंजुमन
कोईइसमेंसोख़्ता-हालहैकोईइसमेंसीना-फ़िगारहै
येअसरहैएकनिगाहकाकिमिज़ाज-ए-तब्अ'बदलदिया
जोहमेशाशिकवा-गुज़ारथावोतुम्हाराशुक्र-गुज़ारहै
येज़रूरीक्याहैकिहरबशररहेनाम-ओ-कामसेबा-ख़बर
मगरइतनाजानचुकेहैंसबकितख़ल्लुसउसका'ग़ुबार'है
  - Ghubaar Bhatti
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy