qalb-o-nazar ke silsile meri nigaah men rahe | क़ल्ब-ओ-नज़र के सिलसिले मेरी निगाह में रहे

  - Ghous Mathravi
क़ल्ब-ओ-नज़रकेसिलसिलेमेरीनिगाहमेंरहे
मुझसेक़रीब-तरथेजोतिरीचाहमेंरहे
क़हर-ए-ख़ुदाकीज़दपेक्यूँँसकेसियाहकार
किसकीसुपुर्दगीमेंथेकिसकीपनाहमेंरहे
सूरत-ए-हालदेखकरसबकोहैफ़िक्रयेकिअब
जिस्मअमाँमेंहोहोकजतोकुलाहमेंरहे
दार-ओ-रसनकेफ़ैसलेसचकेअमीनहोंअगर
थोड़ीसीजुरअत-ए-सुख़नहर्फ़-ए-गवाहमेंरहे
कोईसबबतोथाकि'ग़ौस'फ़हम-ओ-ज़काकेबावजूद
कार-ए-सवाबछोड़करकार-ए-गुनाहमेंरहे
  - Ghous Mathravi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy