saja ke zehan men kitne hi KHvaab soye the | सजा के ज़ेहन में कितने ही ख़्वाब सोए थे

  - Ghazanfar
सजाकेज़ेहनमेंकितनेहीख़्वाबसोएथे
खुलीजोआँखतोख़ुदसेलिपटकेरोएथे
चहारसम्तबसइकबे-कराँसमुंदरहै
बताएँक्याकिसफ़ीनेकहाँडुबोएथे
तहोंमेंरेतउबलतीहैक्यापताथाहमें
ज़मींसमझकेज़मीनोंमेंबीजबोएथे
सियाहरातमेंबच्चेकीतरहचौंकपड़े
तमामदिनजोउजालोंसेलगकेसोएथे
अजीबबातहमाराहीख़ूँहुआपानी
हमींनेआगमेंअपनेबदनभिगोएथे
हमारेहाथसेवोभीनिकलगयाआख़िर
किजिसख़यालमेंहममुद्दतोंसेखोएथे
  - Ghazanfar
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