dekhi hain bazm-e-shauq ki raanaaiyaan bahut | देखी हैं बज़्म-ए-शौक़ की रानाइयाँ बहुत

  - Ghazal Jafari
देखीहैंबज़्म-ए-शौक़कीरानाइयाँबहुत
लिक्खीथींपरनसीबमेंतन्हाइयाँबहुत
हैराँहूँकिसतरहसेवोमक़्बूलहोगया
कहनेकोउसकेसाथथींरुस्वाइयाँबहुत
हमतोहिसार-ए-हिज्रसेबाहरजासके
उसकीतोशहरमेंथींशानासाइयाँबहुत
कुंदनसाजिस्मझूटीअनापरलुटादिया
कानोंमेंगूँजतीरहींशहनाइयाँबहुत
ख़ुदअपनीज़ातमेंहीमुकम्मल'ग़ज़ल'हैंहम
देखीहैंहमनेहुस्नकीरानाइयाँबहुत
  - Ghazal Jafari
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