dil pe giran hai zikr-e-firaq-o-visaal bhi | दिल पे गिराँ है ज़िक्र-ए-फ़िराक़-ओ-विसाल भी

  - Ghazal Jafari
दिलपेगिराँहैज़िक्र-ए-फ़िराक़-ओ-विसालभी
गुज़रेहैंतेरेबादकईमाह-ओ-सालभी
तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ातपेनादिमहैवोबहुत
औरोंसेपूछताहैवोअबमेराहालभी
नाकामइश्क़ज़िंदा-ए-जावेदहोगए
तारीख़-ए-इश्क़देतीहैऐसीमिसालभी
क्याइश्क़मेरेदौरमेंनापैदहोगया
आताहैगाहे-गाहेयेदिलमेंख़यालभी
दिलफिरकिसीकीयादसेघबरागया'ग़ज़ल'
लगतीहैआजमुझकोतबीअतनिढालभी
  - Ghazal Jafari
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