aazmaaungi use main bhi sehar hone tak | आज़माऊँगी उसे मैं भी सहर होने तक

  - Ghazal Jafari
आज़माऊँगीउसेमैंभीसहरहोनेतक
अपनेएहसासकीहिद्दतकोगुहरहोनेतक
कुछतोआदाब-ए-मोहब्बतकाभरमहीरखते
वक़्ततोलगताहैकोंपलकोशजरहोनेतक
अपनीदीवानगी-ए-शौक़काक्याहालकहें
ख़ाकहोजाएँगेहमउनकोख़बरहोनेतक
वक़्तहैअबभी'ग़ज़ल'रोकलोउसकोबढ़कर
कौनमिलताहैदु'आओंमेंअसरहोनेतक
  - Ghazal Jafari
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