shamma-roo 'aashiq ko apne yuñ jalana chahiye | शम्अ-रू 'आशिक़ को अपने यूँँ जलाना चाहिए

  - Ghamgeen Dehlvi
शम्अ-रू'आशिक़कोअपनेयूँँजलानाचाहिए
कुछहँसानाचाहिएऔरकुछरुलानाचाहिए
ज़िंदगीक्यूँँकरकटेबे-शग़लइसपीरीमेंआह
तुमकोअबउसनौजवाँसेदिललगानाचाहिए
इसमैंसबराज़-ए-निहाँहोजाएँगेहमपरअयाँ
फिरउसेइकबारघरअपनेबुलानाचाहिए
फिरयेमुमकिनहैकिमेरेपासतूइकदमरहे
कुछकुछयारबसतुझकोबहानाचाहिए
गोबहुतहोशियार'आशिक़परी-रूहैंतिरे
लेकिनउनमेंएक'ग़मगीं'सादिवानाचाहिए
  - Ghamgeen Dehlvi
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