agar ho chashm-e-haqeeqat to dekh kya hooñ main | अगर हो चश्म-ए-हक़ीक़त तो देख क्या हूँ मैं

  - Gawwas Qureshi
अगरहोचश्म-ए-हक़ीक़ततोदेखक्याहूँमैं
फ़नाकेरंगमेंइकजौहर-ए-बक़ाहूँमैं
तिलिस्म-ए-बंदसेमुश्किलरिहाईहैदिलकी
हिसार-ए-चश्म-ए-फ़ुसूँ-साज़मेंघिराहूँमैं
मिटामिटाकेमुझेएकदिनमिटादेगा
ज़माना-साज़तिरीचालजानताहूँमैं
कमाल-ए-इश्क़तसव्वुरहैऔजपरऐसा
तिरेजमालकोहरशयमेंदेखताहूँमैं
मिरीतलाशमेंगुमहैंमुसाफ़िरान-ए-अदम
हुदूद-ए-वहमसेआगेनिकलगयाहूँमैं
तलाशजिसकीहैहरइककोमैंवोमंज़िलहूँ
जोतयकरसकेकोईवोमरहलाहूँमैं
तलाशजिसकीमुझेखोचुकीहै'ग़व्वास'
उसीकोबहर-ए-तहय्युरमेंढूँढताहूँमैं
  - Gawwas Qureshi
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